Thursday, 13 August 2015
NSA वार्ता: भारत आएंगे सरताज अजीज
नई दिल्ली(13 अगस्त): भारत और पाकिस्तान के बीच 23 और 24 अगस्त को होने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की वार्ता के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार सरताज अजीज भारत आएंगे। इस बात की जानकारी सरताज अजीज ने प्रेस कांफ्रेंस करके दी। उन्होने कहा कि हां मैं 23 अगस्त को होने वाली वार्ता के लिए भारत जाउंगा।
रूस के उफा में पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ ने इस वार्ता के बारे में तय किया था। इसी के तहत इस महीने की 23 औऱ 24 तारीख को एनएसए स्तर की वार्ता होनी है।
काला जादू' का डर दिखा कर 19 दिनों तक लड़की से गैंग रेप
नई दिल्ली (13 अगस्त): दिल्ली के शकरपुर इलाके में रहने वाली एक युवती को बंधक बनाकर 19 दिनों तक उससे रेप किया गया। दुष्कर्म का आरोप एक तांत्रिक सहित दो लोगों पर है। आरोपी ने काला जादू के नाम पर महिला को धमकी देकर चुप रहने को कहा। पुलिस ने युवती की शिकायत पर मामला दर्ज कर आरोपी अब्दुल्ला मुशर्रफ को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार बीते 24 जुलाई को इस युवती शकरपुर थाने में शिकायत दी। उसने बताया कि लगभग एक साल पहले पड़ोसी अक्षय उसे अपने साथ गाजियाबाद के विजय नगर में ले गया था। वहां पर उसके साथ अक्षय और तांत्रिक अब्दुल्ला मुशर्रफ ने दुष्कर्म किया। उन्होंने महिला का अश्लील विडियो भी बना लिया। तांत्रिक ने महिला को धमकी दी कि वह काला जादू कर उसके भाई को मार देगा।
बीते चार जुलाई को अक्षय एक बार फिर उसे अपने साथ विजय नगर ले गया। वहां दोनों ने पहले तो उसकी जमकर पिटाई की। फिर बंधक बनाकर उसे 19 दिनों तक वहां रखा गया। इस दौरान नशीला पदार्थ देकर बार-बार दोनों आरोपियों ने दुष्कर्म किया। अब्दुल्ला ने वहां अपने दो अन्य परिचितों को बुलाया जिन्होंने उसके साथ दुष्कर्म किया। उन दोनों लोगों से अब्दुल्ला ने रुपये लिए। आरोपियों ने कोरे कागत पर महिला के हस्ताक्षर लेने के साथ ही उसका मोबाइल एवं गहने भी छीन लिए। महिला की शिकायत पर मामला दर्ज कर पुलिस की एक टीम ने विजय नगर में छापा मारकर अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर लिया। शिकायत की भनक लगते ही अक्षय फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है।
राधे मां पर डॉली बिंद्रा को जान से मारने की धमकी देने का आरोप
मुंबई। विवादों में घिरीं राधे मां पर एक अौर संगीन आरोप लगा है। टीवी एक्ट्रेस डॉली बिंद्रा ने राधे मां के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं जिसका शक उन्हें राधे मां पर है। बता दें कि डॉली बिंद्रा एक समय रांधे मां की भक्त रही हैं। तो क्या आलिया की जिंदगी में किसी को आने नहीं देंगे उनके पिता? कभी राधे मां की भक्त रहीं डॉली बिंद्रा को अब उसी से मौत का डर सताने लगा है। डॉली बिंद्रा का कहना है कि उन्हें राधे मां से अपनी जान का खतरा है। पुलिस को दी गई लिखित शिकायत में एक्ट्रेस ने आरोप लगाया का उन्हें अलग-अलग फोन नंबरों से धमकी भरे फोन और सोशल मीडिया पर धमकी भरे मैसेज आ रहे हैं। डॉली ने खबर की पुष्टि करते हुए कहा, 'मुझे जान से मारने की धमकी भरे फोन आ रहे हैं। मुझे राधे मां, एमएम गुप्ता और आश्रम के अनुयायीयों पर शक है। पुलिस मामले की जांच करेगी।' उन्होंने दावा किया है कि उनके पास धमकी भरी कॉल्स की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के दौरान पुलिस के मांगने पर वो ये फोन कॉल्स जरूर उपलब्ध कराएंगी। डॉली ने अपने और अपने परिवार के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की है। पिछले दिनों राधे मां की मिनी स्कर्ट में कुछ फोटोज वाइरल हुईं थी जिसके बाद वो विवादों में आ गई हैं। राधे मां पर दहेज उत्पीड़न करने के लिए उकसाने और कुछ लोगों को आत्महत्या के लिए उकसाने का भी आरोप है।
आशिकी 3' में ऋतिक रोशन
मुंबई (13 अगस्त) : भूषण कुमार और भट्ट कैंप 'आशिकी 3' बनाने की तैयारी कर रहे हैं। बॉलिवुड में इस बात की चर्चा है कि 'आशिकी 3' में ऋतिक रोशन मुख्य किरदार निभाएंगे।
1990 में रिलीज़ हुई 'आशिकी' और 2013 में रिलीज़ हुई 'आशिकी 2' सुपरहिट साबित हुई थीं। दोनों फिल्मों के गानों को लोगों ने खूब पसंद किया था।
बता दें कि भट्ट कैंप हमेशा नई टेलेंट को बढ़ावा देने में यकीन रखता रहा है। लेकिन इस बार 'आशिकी 3' को बहुत बड़े पैमाने पर बनाने की तैयारी की जा रही है। ऋतिक रोशन फिलहाल 'मोहनजोदाड़ो' में व्यस्त हैं।
'आशिकी 3' का म्युजिक भी हाईलाइट होगा। ऋतिक रोशन को बॉलिवुड में सबसे अच्छा डॉन्सिंग स्टार माना जाता है। ऐसे में बहुत संभव है कि 'आशिकी 3' का मुख्य किरदार भी डॉन्सिंग पर ही आधारित हो।
1990 में रिलीज हुई 'आशिकी' के सुपरहिट गाने 'धीरे धीरे से' पर ऋतिक रोशन ने हाल में डॉन्स शूट कराया था। फिल्म के निर्माता और भूषण कुमार के पिता गुलशन कुमार को सम्मान देने के लिए इस गाने को रीक्रिएट किया गया है। सूत्रों के मुताबिक इसी शूट के दौरान भूषण कुमार और ऋतिक रोशन ने किसी फिल्म में साथ काम करने का फैसला किया था।
Wednesday, 12 August 2015
लोकसभा में सुषमा के भाषण के बाद रो पड़े आडवाणी
नई दिल्ली (12 अगस्त): लोकसभा में बुधवार को लगातार भारी हंगामे के बीच विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ललित मोदी विवाद के मुद्दे पर अपनी सफाई दी। इस दौरान पहले तो बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी बड़े ध्यान से उनका भाषण सुनते रहे। लेकिन फिर सुषमा के भाषण के बाद आडवाणी भावुक हो गए और रो पड़े। आडवाणी ने संसद के भीतर ही रोते रोते सुषमा स्वराज की पीठ थपथपाई।
जोरदार हंगामे के बीच संसद में आज सरकार ने विपक्ष के सामने हाथ जोड़कर संसद को चलने की अपील की। पहले वेंकैया नायडू ने हाथ जोड़कर अपील की, फिर सुषमा स्वराज ने लोकसभा में हाथ जोड़कर कहा कि वो चर्चा को तैयार हैं। कृपया विपक्ष चर्चा करने दें।
ये हैं मोहब्बतें' के सेट पर घायल हुए करन पटेल
नई दिल्ली (12 अगस्त): 'ये हैं मोहब्बतें' टीवी सीरियल के शूटिंग के दौरान इसमें रमन भल्ला का रोल निभा रहे ऐक्टर करन पटेल घायल हो गए हैं। करन ने इस बात की जानकारी ट्विटर पर शेयर की जब टीवी प्रड्यूसर निवेदिता बसु ने उनका हालचाल पूछा।
निवेदिता ने करन से ट्विटर पर पूछा, करन तुम्हारी तबियत खराब है क्या? तुम्हे पता है कि मैं तुम्हें कॉल भी कर सकती थी, लेकिन मैं सोशल नेटवर्किंग साइट पर तुमसे इस बारे में पूछ रही हूं। इसके जवाब में करन ने कहा, सीरियल में फाइट सीक्वेन्स के दौरान एक छोटा सा हादसा हो गया था।
निवेदिता ने करन से ट्विटर पर पूछा, करन तुम्हारी तबियत खराब है क्या? तुम्हे पता है कि मैं तुम्हें कॉल भी कर सकती थी, लेकिन मैं सोशल नेटवर्किंग साइट पर तुमसे इस बारे में पूछ रही हूं। इसके जवाब में करन ने कहा, सीरियल में फाइट सीक्वेन्स के दौरान एक छोटा सा हादसा हो गया था।
काँवड़िए लोगों की दुआएँ और आशीर्वाद के बजाय श्राप बटोरते हैं
किसी भी धर्म या उपासना पद्धति की हो. समझदार और बुद्धिजीवी किस्म के लोग धार्मिक आस्थाओं से जुड़ी पेंचीदगियों पर चर्चा करने से इसलिए कतराते हैं कि उन्हें लगता है कि हमारा जनमानस तथ्यों को समझने की मनोदशा में ही नहीं है. लेकिन मेरा मानना है कि प्रयास जारी रखना चाहिए. इसलिए हमें काँवड़ियों से जुड़े समाज शास्त्र और अर्थशास्त्र को भी जानना चाहिए.देश में सावन का महीना अपनी निराली रंगत लेकर आता है. बारिश का मौसम धरती की खुशबू में कहीं सोंधापन तो कही मादकता भर देता है. वनस्पति जगत की हरियाली चमचमा उठती है. फ़िज़ा में उमंग तो दिखती है, लेकिन खुशहाली नहीं. जबकि खुशहाली सावन की बुनियादी ख़ासियत है. दरअसल, बदलते दौर के साथ सावन में समाहित खुशहाली का हरण हो चुका है. कमोबेश, वैसे ही जैसे रावण ने सीता का हरण किया था. काश! देश का बहुसंख्यक हिन्दू समाज और ख़ासकर उनके धार्मिक नेता इसे समझ पाते और अपने अनुयायियों का सही मार्गदर्शन करते.
बात सिर्फ़ इतना तय करने की है कि क्या हमारे धार्मिक संस्कार हमें ये नहीं सिखाते कि अपनी खुशी के लिए हमारा किसी और को जाने या अनजाने में तकलीफ़ पहुँचाना पूर्णतः और विशुद्ध रूप से अधर्म है, पाप है! हमें इससे बचना चाहिए. लेकिन दुर्भाग्य से सावन में उमड़ने वाले काँवड़िए और उनके सेवादारों को शायद यही बह्म-ज्ञान नहीं है. इसलिए काँवड़ियों के मौसम में बहुत बड़ी आबादी दहशत और ख़ौफ़ के बीच जीती है. ये पूरी तरह से अधार्मिक है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की करोड़ों की आबादी के जनजीवन पर काँवड़ियों का असर किसी टिड्डी दल के हमले की तरह होता है. दिल्ली और इससे सटे हरियाणा-राजस्थान के मुख्य मार्गों, गली-मोहल्लों के लिए सावन और कांवड़िए किसी मानव-निर्मित प्राकृतिक आपदा से कम नहीं हैं. जिनका नियत समय पर आना तय बन चुका है. क्या हमें इस परिवेश को बदलने के लिए आगे नहीं आना चाहिए?
हरिद्वार के चारों ओर बसे 20-25 ज़िलों में जो लोग रहते हैं, उन्हें सावन में काँवड़ियों की टोलियों को अपने आस-पास से गुज़रते हुए देखकर यदि कोई धार्मिक श्रद्धा का अहसास होता है तो वो क्षणिक ही रहता है. क्योंकि वास्तव में काँवड़ियों की गतिविधियों से उनका जीना मुहाल हो जाता है. पुलिस और प्रशासन पर अज़ीबोग़रीब सकपकाहट हावी रहती है. जगह-जगह ट्रैफिक जाम रहता है. हर तरफ लोगों में गुस्सा और चिड़चिड़ाहट दिखायी देती है. सड़कों के किनारे बसे होटल-ढाबे वाले अपना काम-धंधा बन्द कर देते हैं क्योंकि जब कोई उनके पास रुकेगा ही नहीं तो वो क्या कमाएँगे-खाएँगे! ये काँवड़ियों के अर्थशास्त्र का बहुत दुःखद पहलू है. करोड़ों लोगों की आमदनी इस मौसम में शून्य हो जाती है.
सैकड़ों की संख्या में स्कूलों-कालेजों को मज़बूरन छुट्टियाँ करनी पड़ती हैं, क्योंकि सड़कों पर ट्रैफिक बन्द कर दिया जाता है. लाखों-करोड़ों वाहन सड़कों पर दौड़ते नहीं, बल्कि रेंगते हैं. वो करोड़ रुपये का पेट्रोल-डीज़ल नाहक जलाने के लिए मज़बूर होते हैं. इससे देश के उस बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भंडार पर बुरा असर पड़ता जिससे हम पेट्रोलियम पदार्थों का आयात करते हैं. अनन्त और निरन्तर जाम के दौरान वाहनों से इतना प्रदूषण होता है, जिसके नुक़सान का आंकलन करना तो अभी हिन्दुस्तान के मिज़ाज़ में ही नहीं है. काँवड़ियों के दबदबे वाले दौर में मुसलमान उनके आसपास फटकने से बचते हैं, क्योंकि न जाने कौन सी बात साम्प्रदायिक उन्माद की शक्ल अख़्तियार कर ले! ये कैसा धार्मिक आचरण है जो सामाजिक समरसता को ललकारता है!


















