Sunday, 14 June 2015
मसूरी में लगा 6 KM लंबा जाम, पर्यटक बोले हाय राम
पार्किंग की कमी और मसूरी पहुंचने के लिए एक ही रास्ता होने की वजह से शनिवार (14 जून) को पहाड़ों की रानी घूमने आए लोगों की जमकर फजीहत हुई। मसूरी में पर्याप्त पार्किंग नहीं होने के कारण जहां लोगों ने वाहन सड़क पर खड़ा कर दिया और जाम लग गया, वहीं एक ही रास्ता होने के कारण बसें मसूरी से नीचे नहीं उतर पाईं और दून में यात्री परेशान होते रहे।टिकट खरीदकर घंटों बस का इंतजार किया, लेकिन बसें नहीं पहुंचीं। कई वापस चले गए और कुछ टैक्सी से मसूरी के लिए निकले, लेकिन रास्ते में जाम में फंस गए। स्थिति यह रही कि मसूरी में इस सीजन का सबसे लंबा जाम लोगों ने करीब चार तक घंटे तक झेला। जाम की लंबाई छह किमी से अधिक बताई गई।पहाड़ों की रानी में शनिवार को पर्यटकों की भीड़ सुबह से ही उमड़ने लगी थी। वाहनों की संख्या अधिक होने और पार्किंग सुविधा पर्याप्त नहीं होने की वजह से हर तरफ जाम ही जाम लग गया। पर्यटकों को तकरीबन चार घंटे तक जाम में फंसे रहना पड़ा। दरअसल, दून में आईएमए की पीओपी में शामिल होने आए लोगों और मैदानी क्षेत्रों में गर्मी पड़ने के कारण शनिवार को पर्यटक मसूरी की ओर निकल पड़े।इसका असर यह रहा कि सुबह से ही मसूरी-देहरादून रोड पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। दिन चढ़ने के साथ वाहनों की संख्या बढ़ती चली गई। पार्किंग फुल होने से पर्यटकों ने सड़क के किनारे वाहन खड़े कर दिए। इससे शहर में जाम लगने लगा और यातायात व्यवस्था पटरी से उतर गई।
माधुरी दीक्षित पर सालों से मरते हैं ये एक्टर!
मुंबई। मनोज बाजपेयी की एक्टिंग का कौन कायल नहीं है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मनोज बाजपेयी भी किसी के कायल हैं। पाकिस्तानी एक्ट्रेस मीरा के खिलाफ गिरफ्तारी का वॉरंट मनोज का एक बड़ा सीक्रेट पता चला है। सुनने में आया है कि वो माधुरी दीक्षित को बहुत पसंद करते हैं और एक्ट्रेस पर उनका क्रश है। मनोज अभी से नहीं बल्कि कई दशकों से उनके दीवाने हैं। 1989 में आई फिल्म 'राम लखन' देखते वक्त वो माधुरी से अपनी नजरें ही नहीं हटा पा रहे थे। उनका मानना है कि इंडस्ट्री में माधुरी जैसी खूबसूरत और आकर्षक एक्ट्रेस कोई नहीं है। खैर, ये तो सिर्फ मनोज बाजपेयी का ही नहीं बल्कि हमारा भी मानना है कि माधुरी जैसा इस इंडस्ट्री में कोई नहीं!
पत्नी गई मायके तो पति ने साली को किया लहूलुहान
कोटद्वार के धुमाकोट थाने के अंतर्गत ग्राम नलाई तल्ली में एक व्यक्ति ने पत्नी के धोखे में अपनी तेरह वर्षीय साली पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ वार करके उसे लहूलुहान कर दिया। घटना शनिवार रात की है।
किशोरी की हालत नाजुक बनी है। उसे पुलिस ने धुमाकोट में प्राथमिक उपचार के बाद उसे रामनगर और वहां से उसे हल्द्वानी रेफर कर दिया गया है। वारदात के बाद आरोपी जीजा फरार होने का प्रयास कर रहा था लेकिन पुलिस की मदद से उसे रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया गया है।
थानाध्यक्ष एनके बचकोटी के अनुसार उन्हें परिजनों ने घटना की जानकारी रविवार सुबह दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तड़के गांव पहुंची और वहां गंभीर रूप से घायल 13 वर्षीय अंकिता पुत्री महेंद्र सिंह को अस्पताल पहुंचाया।
अंकिता के दोनों हाथों, गले तथा सिर पर धारदार हथियार से प्रहार किया है। वह बुरी तरह जख्मी है जिसे तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धुमाकोट पहुंचाया गया। घायल कुछ बताने की स्थिति में नहीं है।
किशोरी की हालत नाजुक बनी है। उसे पुलिस ने धुमाकोट में प्राथमिक उपचार के बाद उसे रामनगर और वहां से उसे हल्द्वानी रेफर कर दिया गया है। वारदात के बाद आरोपी जीजा फरार होने का प्रयास कर रहा था लेकिन पुलिस की मदद से उसे रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया गया है।
थानाध्यक्ष एनके बचकोटी के अनुसार उन्हें परिजनों ने घटना की जानकारी रविवार सुबह दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तड़के गांव पहुंची और वहां गंभीर रूप से घायल 13 वर्षीय अंकिता पुत्री महेंद्र सिंह को अस्पताल पहुंचाया।
अंकिता के दोनों हाथों, गले तथा सिर पर धारदार हथियार से प्रहार किया है। वह बुरी तरह जख्मी है जिसे तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धुमाकोट पहुंचाया गया। घायल कुछ बताने की स्थिति में नहीं है।
वाहन भिड़ने पर दो संप्रदाय के युवको में टकराव
मेरठ : लालकुर्ती थाना क्षेत्र स्थित श्री प्लाजा के सामने बाइक और कार की भिड़ंत के बाद दो संप्रदाय के युवकों में जमकर मारपीट हुई। इस दौरान गैर संप्रदाय के कुछ युवकों के मस्जिद में घुसने पर माहौल गरमा गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थिति संभाली। तनाव के मद्देनजर इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है।
लालकुर्ती क्षेत्र में आफताब की कोठी निवासी संप्रदाय विशेष का युवक शनिवार रात बाइक पर घर लौट रहा था। बेगमपुल से जीरो माइल मार्ग पर श्री प्लाजा के सामने एक कार से युवक की बाइक भिड़ गई। कहासुनी के बाद कार चालक और उक्त युवक के बीच मारपीट हो गई। इसी क्रम में श्री प्लाजा में बैठे कुछ व्यापारी घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। वहीं, संप्रदाय विशेष के दो युवक भी घटनास्थल पर पहुंच गए।
बाइक सवार युवक ने कार चालक से मारपीट की तो श्री प्लाजा के व्यापारियों ने विरोध किया। इसी बात को लेकर गाली-गलौज व मारपीट शुरू हो गई। बाइक सवार युवक भागकर लालकुर्ती पैंठ बाजार में भाव वाली मस्जिद के मुख्य गेट से अंदर घुसा और पीछे वाले गेट से भाग निकला। पीछा कर रहे युवक भी मस्जिद में पहुंच गए और हंगामा किया। इस पर मस्जिद में मौजूद लोगों ने विरोध किया, जिस पर मारपीट हो गई। मस्जिद में मारपीट की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और समझा-बुझाकर झगड़ा शांत किया।
संप्रदाय विशेष के कुछ लोगों का आरोप था कि जो युवक मस्जिद में घुसे थे, उनमें से कुछ शराब के नशे में थे। फिलहाल, तनाव के चलते पुलिस बल तैनात है। दोनों पक्षों की ओर से तहरीर नहीं दी गई है। एसएसआइ विनोद कुमार ने बताया कि बेगमपुल पर बाइक और कार की साइड लगने को लेकर विवाद हुआ था। दावा किया कि हालात सामान्य हैं।
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ग़ज़ियाबाद वसुंधरा से झुग्गी वासियों को प्रताड़ित कर उन्हें हटाने के मामले को लेकर शनिवार को भारी संख्या में झुग्गी में रहने वाली महिलाएं व बच्चे सीओ इंदिरापुरम अतुल यादव के दफ्तर पहुंचे। उन्होंने सीओ को ज्ञापन सौंपा और समस्या का समाधान करने की मांग की। सीओ ने कहा है कि समस्या में पुलिस का सीधे कोई हस्तक्षेप नहीं है वे अन्य विभाग के अधिकारियों से बात करेंगे।
सपा महिला सभा की महानगर अध्यक्ष रितु खन्ना ने कहा है कि झुग्गी में रहने वाले लोग किसी तरह मजदूरी करके झुग्गी में रह कर परिवार को पाल रहे हैं। वसुंधरा में रहने वाले कुछ दबंग लोग इनकी झुग्गियां हटाकर उनके बेघर करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह सभी महिलाएं व बच्चे चाहते हैं कि जब तक इनके रहने का कही और इंतजाम नहीं हो जाता तब तक इन्हें जगह खाली करने के लिए परेशान न किया जाए। रितु ने कहा है कि वह जल्द ही मामले को लेकर जिलाधिकारी से भी मिलेंगी और गरीबों के हक की आवाज उठाएगी। सीओ अतुल यादव ने वसुंधरा चौकी प्रभारी को निर्देश दिया है कि झुग्गियों को हटाने का कार्य नियमानुसार हो कोई बेवजह लॉ एंड आर्डर नहीं बिगाड़े। सीओ ने कहा कि रेजिडेंट्स की हर समस्या को वह गंभीरता से लेते हैं। लोगों की समस्या का समाधान करा दिया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में रीना मलिक, आशा कुशवाहा, सुनीता, क्रांति व रंजीता सहित बड़ी संख्या में बच्चे व महिलाएं रहीं।
जब मस्जिद को लेकर भिड़ गए देवबंदी और बरेलवी
मुरादाबादशनिवार को मुरादाबाद जब्बार कालोनी में मस्जिद-ए-अरकम में इमारत को लेकर हुए विवाद में देवबंदी व बरेलवी लोगों को समझाती पुलिसमुरादाबाद जब्बार कालोनी में मस्जिद-ए-अकरम में इमाम को लेकर एक दूसरे पर आरोप लगाते देवबंदी व बरेलवी मुस्लिम।क्या हो रहा हैः शनिवार को मुरादाबाद की जब्बार कालोनी में मस्जिद-ए-अरकम में इमामत को लेकर हुए विवाद में जुटी भीड़ को देखकर चिंतित मुद्रा में देवबंदी मसलक के मुसलमान।शनिवार को मुरादाबाद की जब्बार कालोनी में मस्जिद-ए-इमामत को लेकर हुए विवाद की खबर पाकर मौके पर पहुंची पुलिस फोर्स।शनिवार को मुरादाबाद जब्बार कालोनी में स्थित मस्जिद-ए-अरकम में बरेलवी और देवबंदी लोगों के बीच विवाद के बाद पसरा सन्नाटा।
लालू-नीतीश के साथ आने से ऐसे फायदे में रहेगी भाजपा, आप भी जानें
कांग्रेस ने बिहार चुनाव के लिए अच्छा होमवर्क किया है। उसने 'चुनाव कैसे जीतें' नाम की अमित शाह की किताब का पहला पन्ना ही चुरा लिया है। उस पहले पन्ने पर अमित शाह के विजयी फॉर्मूले का पहला सूत्र लिखा था- विपक्ष को विभाजित रखो।
अमित शाह ने यह काम देश भर में कर दिखाया है। खास तौर पर वहां, जहां बीजेपी के वोट 25-30 प्रतिशत के करीब हैं।
गिनते जाइए- हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर और सबसे बड़ा नाम- यूपी। इन सारे राज्यों में बीजेपी के लिए ज़रूरी रहा कि मुक़ाबला तिकोना या चौतरफ़ा रहे। तिकोने या चौतरफ़ा मुकाबले में बीजेपी के 25-30 प्रतिशत वोट आसानी से जीत दिला देते थे।
दांव
कई बार पिटने के बाद कांग्रेस यह दांव समझ गई? बिहार में नीतीश कुमार को लालू प्रसाद से सीएम उम्मीदवार घोषित करवाकर कांग्रेस यह मान सकती है कि उसने बीजेपी का विजय मंत्र बेअसर कर दिया है। लेकिन अमित शाह की उसी किताब में और भी पन्ने हैं। पहला पन्ना फट गया, तो अब किताब दूसरे पन्ने से पढ़ना शुरू की जाएगी।
मजेदार बात यह है कि लालू-नीतीश-कांग्रेस गठजोड़ ने दूसरे पन्ने की इबारत की कल्पना किए बिना ही पहले पन्ने का रट्टा मार दिया लगता है। सबसे पहला सेल्फ-गोल दागा है 'नॉन प्लेइंग कैप्टन' लालू प्रसाद ने। उन्होंने कहा कि हम सेक्युलरिज्म की खातिर एकजुट हुए हैं।
और यह भी कहा कि मैं सबसे बड़ा सेक्युलरिस्ट हूं। लालू को इस बात का डर है कि करीब 60 विधानसभा सीटों पर 17 प्रतिशत और पूरे बिहार में करीब 14 प्रतिशत मुस्लिम वोट कहीं (उत्तर प्रदेश की तरह) बँट न जाएँ।लालू जितने बड़े सेक्युलरिस्ट बनने की कोशिश करेंगे, सारे ग़ैर-मुस्लिम वोट आपसे उतने ही दूर होते जाएंगे, महाराष्ट्र या हरियाणा के चुनाव अमित शाह ने मुस्लिम वोट बंटने या न बंटने के आधार पर नहीं जीते थे।
अमित शाह ने यह काम देश भर में कर दिखाया है। खास तौर पर वहां, जहां बीजेपी के वोट 25-30 प्रतिशत के करीब हैं।
गिनते जाइए- हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर और सबसे बड़ा नाम- यूपी। इन सारे राज्यों में बीजेपी के लिए ज़रूरी रहा कि मुक़ाबला तिकोना या चौतरफ़ा रहे। तिकोने या चौतरफ़ा मुकाबले में बीजेपी के 25-30 प्रतिशत वोट आसानी से जीत दिला देते थे।
दांव
कई बार पिटने के बाद कांग्रेस यह दांव समझ गई? बिहार में नीतीश कुमार को लालू प्रसाद से सीएम उम्मीदवार घोषित करवाकर कांग्रेस यह मान सकती है कि उसने बीजेपी का विजय मंत्र बेअसर कर दिया है। लेकिन अमित शाह की उसी किताब में और भी पन्ने हैं। पहला पन्ना फट गया, तो अब किताब दूसरे पन्ने से पढ़ना शुरू की जाएगी।
मजेदार बात यह है कि लालू-नीतीश-कांग्रेस गठजोड़ ने दूसरे पन्ने की इबारत की कल्पना किए बिना ही पहले पन्ने का रट्टा मार दिया लगता है। सबसे पहला सेल्फ-गोल दागा है 'नॉन प्लेइंग कैप्टन' लालू प्रसाद ने। उन्होंने कहा कि हम सेक्युलरिज्म की खातिर एकजुट हुए हैं।
और यह भी कहा कि मैं सबसे बड़ा सेक्युलरिस्ट हूं। लालू को इस बात का डर है कि करीब 60 विधानसभा सीटों पर 17 प्रतिशत और पूरे बिहार में करीब 14 प्रतिशत मुस्लिम वोट कहीं (उत्तर प्रदेश की तरह) बँट न जाएँ।लालू जितने बड़े सेक्युलरिस्ट बनने की कोशिश करेंगे, सारे ग़ैर-मुस्लिम वोट आपसे उतने ही दूर होते जाएंगे, महाराष्ट्र या हरियाणा के चुनाव अमित शाह ने मुस्लिम वोट बंटने या न बंटने के आधार पर नहीं जीते थे।
जिस आधार पर जीते थे, लालू प्रसाद ने उसी आधार को बार-बार मज़बूत किया है। जैसे कि बीजेपी की जीत का पहला ठोस आधार था कि वोटर चाहे जो भी हो, जिस भी जाति का हो, जहां भी हो, वह पिटे-पिटाए नेताओं से अघा चुका था।
सड़ी-गली पूरी राजनीति को नए चेहरों और नई राजनीति से चुनौती देने की इस रणनीति को शरद पवार समझ गए थे। गौर कीजिए, कांग्रेस ने महाराष्ट्र में भी कोशिश की थी कि शरद पवार मुख्यमंत्री पद के दावेदार बन जाएं, जिसे चतुर पवार ने नकार दिया था। यहाँ पवार जैसी समझ दिखाने में लालू और नीतीश कुमार चूक गए हैं। उल्टे एक साथ आकर उन्होंने बीजेपी का काम आसान कर दिया है।
लालू-नीतीश-कांग्रेस एकता का ही दूसरा पहलू यही है कि सारे लालू विरोधी, नीतीश विरोधी, कांग्रेस विरोधी मतदाताओं के सामने अब बीजेपी एकमात्र विकल्प है।
बीजेपी की जीत का दूसरा आधार था विकास का वादा। यह मतदाता को सीधा निमंत्रण था कि आप बाकी सारे मुद्दों को परे रखकर इस मुद्दे पर अपना वोट दें।
पूरे सेक्युलर कुनबे के पास इसका कोई उत्तर नहीं था। अब विकास और सुशासन इतने बड़े मुद्दे बन चुके हैं कि आप यह उम्मीद नहीं कर सकते कि बिहार उन्हें पूरी तरह दरकिनार करके अपनी पुरानी लकीर पर चलेगा।इससे पहले अमित शाह अपनी किताब का तीसरा पन्ना खोलते, नई राजनीति की बिसात बिछाते, लालू और नीतीश ने अपनी चाल चल दी है। लालू और नीतीश इकट्ठे हुए हैं पुराने फार्मूलों पर आधारित, पुरानी राजनीति के लिए, दो ब्राह्मण प्लस, दो भूमिहार बराबर छह दलित जैसी जुगत लगाने के लिए।
अब लालू और नीतीश अगर अपनी एकजुटता को जायज़ ठहराने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें सारी बहस को विकास की बातों से परे और जातिवाद-सेक्युलरिज्म के मुद्दों पर अनिवार्य तौर पर ले जाना होगा।
अगर वे विकास के मुद्दे पर भी टांग अड़ाते हैं तो एक-दूसरे को ज़हर बताकर पी जाने जैसे सुसाइड नोट वाले बयान देने से ज्यादा कुछ नहीं कर सकेंगे। फिर यह अमित शाह की किताब के भीतरी पन्नों की इबारत नहीं है। वास्तव में इस किताब के भीतरी पन्नों में एक ही वाक्य लिखा है- हमेशा नई इबारत लिखो, और नई इबारत लिखने के लिए बिहार चुनाव एक बहुत अच्छा विषय है।


















