हरिद्वार के घाड़ क्षेत्र में आदमखोर गुलदार के खूनी कदम से क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल है। क्षेत्र के लोगों में इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
दो जून 2014 को औरंगाबाद गांव में गुलदार घुस गया था। उसके बाद नौ जून 2014 को फिर एक गुलदार गांव में घुस गया था। उस समय गुलदार ने चार ग्रामीणों को घायल किया था। धनौरी पुलिस टीम पर हमला करने का प्रयास किया लेकिन कार के शीशे बंद होने से पुलिसकर्मी जान बचाने में सफल रहे।
इस बार जसवावाला गांव में गुलदार ने तीन साल के मासूम को अपना निवाला बनाया। इससे ग्रामीणों में दहशत है। कई ग्रामीणों को कहना है कि वन विभाग पहाड़ों में आदमखोर गुलदारों को क्षेत्र के आसपास के जंगलों में छोड़े रहे हैं।लेकिन दूसरी ओर गुलदार आबादी की ओर आ रहे हैं। जबकि कुछ लोगों को कहना है कि राजाजी टाईगर रिजर्व में टाईगर और गुलदारों की संख्या बढ़ने से वह लोगों पर हमला कर रहे हैं।
धनौरी के जसवावाला गांव में शाम साढ़े पांच बजे बच्चे को निवाला बनाने की सूचना स्थानीय ग्रामीणों ने खानपुर के रेंजर को दे दी थी, लेकिन वन विभाग की टीम को गांव तक पहुंचने में सवा तीन घंटे लग गए।
खानपुर के वन क्षेत्राधिकारी और जिले के बड़े अधिकार मौके पर नहीं पहुंचे। केवल एक वन दरोगा और एक बीट अधिकारी को मौके पर भेजा गया। इससे ग्रामीण में रोष है। डीएफओ एचके सिंह ने बताया कि मासूम के परिजनों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
दो जून 2014 को औरंगाबाद गांव में गुलदार घुस गया था। उसके बाद नौ जून 2014 को फिर एक गुलदार गांव में घुस गया था। उस समय गुलदार ने चार ग्रामीणों को घायल किया था। धनौरी पुलिस टीम पर हमला करने का प्रयास किया लेकिन कार के शीशे बंद होने से पुलिसकर्मी जान बचाने में सफल रहे।
इस बार जसवावाला गांव में गुलदार ने तीन साल के मासूम को अपना निवाला बनाया। इससे ग्रामीणों में दहशत है। कई ग्रामीणों को कहना है कि वन विभाग पहाड़ों में आदमखोर गुलदारों को क्षेत्र के आसपास के जंगलों में छोड़े रहे हैं।लेकिन दूसरी ओर गुलदार आबादी की ओर आ रहे हैं। जबकि कुछ लोगों को कहना है कि राजाजी टाईगर रिजर्व में टाईगर और गुलदारों की संख्या बढ़ने से वह लोगों पर हमला कर रहे हैं।
धनौरी के जसवावाला गांव में शाम साढ़े पांच बजे बच्चे को निवाला बनाने की सूचना स्थानीय ग्रामीणों ने खानपुर के रेंजर को दे दी थी, लेकिन वन विभाग की टीम को गांव तक पहुंचने में सवा तीन घंटे लग गए।
खानपुर के वन क्षेत्राधिकारी और जिले के बड़े अधिकार मौके पर नहीं पहुंचे। केवल एक वन दरोगा और एक बीट अधिकारी को मौके पर भेजा गया। इससे ग्रामीण में रोष है। डीएफओ एचके सिंह ने बताया कि मासूम के परिजनों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।








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