हिमाचल सरकार ने सभी छोटे-बड़े कामों के लिए अब एफिडेविट देने का झंझट खत्म कर दिया है। केवल कोर्ट और कानूनन जरूरी कार्यों के लिए ही शपथ पत्र देना जरूरी होगा। सभी सरकारी कार्यालयों में अब महज सेल्फ डेक्लरेशन से ही काम चल सकेगा। चाहे जन्म के बाद बच्चे का पंजीकरण कराने में देरी हुई हो या फिर गैस सब्सिडी आदि। प्रधान सचिव कार्मिक एसकेबीएस नेगी ने इस संबंध में तमाम विभागों और सरकारी एजेंसियों को आदेश जारी कर दिए हैं।
विभागों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अकसर यह देखा गया है कि सरकार की दिन-प्रतिदिन की कार्यप्रणाली में स्टांप पेपर, मजिस्ट्रेट या नोटरी से प्रमाणित प्रमाण-पत्रों का चलन है। इससे आवेदकों के काम में देरी हो रही है। अधिकतर कामों में ऐसे हलफनामे लेना जरूरी नहीं होता है।निचले स्तर के अधिकारियों या कर्मचारियों की ओर से ऐसा कानून की अज्ञानता से किया जा रहा है या फिर पूर्व से चले आ रहे नियम फॉलो किए जा रहे हैं। एक एफिडेविट पर 20 रुपये से लेकर 200 रुपये खर्च हो जाते हैं। इसमें समय अलग से बर्बाद होता है।
अब तय किया गया है कि सरकार की सारी एजेंसियां, विभाग, संगठन आदि तत्काल हलफनामे लेना बंद करें। आवेदकों से सेल्फ डेक्लरेशन ही लें। कानून के मुताबिक झूठी सेल्फ डेक्लरेशन देने वालों को भी दंडित किया जा सकता है। सरकार के ये आदेश अदालतों, अर्द्धन्यायिक इकाइयों जैसे उपभोक्ता आयोग, प्रशासनिक ट्रिब्यूनल, लोकायुक्त आदि पर लागू नहीं होंगे। हिमाचली बोनाफाइड प्रमाणपत्र में अब एफिडेविट नहीं लगेगा। जन्म तिथि प्रमाणपत्र में अब एफिडेविट नहीं लगेगा। डेथ सर्टिफिकेट में अब एफिडेविट नहीं लगेगा। आय प्रमाणपत्र में अब एफिडेविट नहीं लगेगा। कैटेगरी सर्टिफिकेट में अब एफिडेविट नहीं लगेगा। युवा मंडलों का पंजीकरण में अब एफिडेविट नहीं लगेगा। जनहित से जुड़े़ अन्य कार्य में अब एफिडेविट नहीं लगेगा। विभिन्न विभागों से जुडे़ कार्य में अब एफिडेविट नहीं लगेगा।
हिमाचल सरकार के कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव एसकेबीएस नेगी ने बताया कि प्रदेश सरकार ने आम लोगों को सुविधाएं देने के लिए कोर्ट से संबंधित और अर्द्धन्यायिक सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी कार्यों में एफि डेविट प्रथा को खत्म कर दिया है। इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकारी विभागों और एजेंसियों को इसे तुरंत प्रभाव से लागू करने को कह दिया गया है।
विभागों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अकसर यह देखा गया है कि सरकार की दिन-प्रतिदिन की कार्यप्रणाली में स्टांप पेपर, मजिस्ट्रेट या नोटरी से प्रमाणित प्रमाण-पत्रों का चलन है। इससे आवेदकों के काम में देरी हो रही है। अधिकतर कामों में ऐसे हलफनामे लेना जरूरी नहीं होता है।निचले स्तर के अधिकारियों या कर्मचारियों की ओर से ऐसा कानून की अज्ञानता से किया जा रहा है या फिर पूर्व से चले आ रहे नियम फॉलो किए जा रहे हैं। एक एफिडेविट पर 20 रुपये से लेकर 200 रुपये खर्च हो जाते हैं। इसमें समय अलग से बर्बाद होता है।
अब तय किया गया है कि सरकार की सारी एजेंसियां, विभाग, संगठन आदि तत्काल हलफनामे लेना बंद करें। आवेदकों से सेल्फ डेक्लरेशन ही लें। कानून के मुताबिक झूठी सेल्फ डेक्लरेशन देने वालों को भी दंडित किया जा सकता है। सरकार के ये आदेश अदालतों, अर्द्धन्यायिक इकाइयों जैसे उपभोक्ता आयोग, प्रशासनिक ट्रिब्यूनल, लोकायुक्त आदि पर लागू नहीं होंगे। हिमाचली बोनाफाइड प्रमाणपत्र में अब एफिडेविट नहीं लगेगा। जन्म तिथि प्रमाणपत्र में अब एफिडेविट नहीं लगेगा। डेथ सर्टिफिकेट में अब एफिडेविट नहीं लगेगा। आय प्रमाणपत्र में अब एफिडेविट नहीं लगेगा। कैटेगरी सर्टिफिकेट में अब एफिडेविट नहीं लगेगा। युवा मंडलों का पंजीकरण में अब एफिडेविट नहीं लगेगा। जनहित से जुड़े़ अन्य कार्य में अब एफिडेविट नहीं लगेगा। विभिन्न विभागों से जुडे़ कार्य में अब एफिडेविट नहीं लगेगा।
हिमाचल सरकार के कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव एसकेबीएस नेगी ने बताया कि प्रदेश सरकार ने आम लोगों को सुविधाएं देने के लिए कोर्ट से संबंधित और अर्द्धन्यायिक सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी कार्यों में एफि डेविट प्रथा को खत्म कर दिया है। इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकारी विभागों और एजेंसियों को इसे तुरंत प्रभाव से लागू करने को कह दिया गया है।








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